ED अधिकारियों की याचिका पर जवाब में देरी, हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन पर लगाई 10 हजार की लागत

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी अधिकारियों की याचिका से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 10 हजार रुपये की लागत लगाई है। मामला हेमंत सोरेन की ओर से दर्ज कराई गई FIR और उसके आधार पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ शुरू हुई आपराधिक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। गुरुवार को जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में सुनवाई के दौरान सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। अदालत ने समय देने की मांग स्वीकार कर ली, लेकिन पहले भी समय मांगे जाने का हवाला देते हुए 10 हजार रुपये की लागत लगाने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह राशि झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (JSL SA) में जमा कराने को कहा है। साथ ही जवाब निर्धारित समय के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी।

2024 में ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुई थी FIR

यह मामला जनवरी 2024 की उस कार्रवाई से जुड़ा है, जब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में दिल्ली स्थित हेमंत सोरेन के आवास पर तलाशी ली थी। इसके बाद 31 जनवरी 2024 को रांची के SC/ST थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी।

FIR में ईडी अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल समेत अन्य के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत आरोप लगाए गए थे। सोरेन की शिकायत में अधिकारियों पर उन्हें परेशान करने और उनकी आदिवासी पहचान के कारण निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था।

ED अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

FIR दर्ज होने के बाद ईडी अधिकारियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और अपने खिलाफ दर्ज FIR तथा उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्रवाई को रद्द करने की मांग की। अधिकारियों ने पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था।

4 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अदालत ने उस समय ईडी अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम निर्देश भी दिया था।

अब 2 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

गुरुवार की सुनवाई में सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा गया था। अदालत ने चार सप्ताह का समय देते हुए 10 हजार रुपये की लागत जमा कराने का निर्देश दिया। अब मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

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