734 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, जमशेदपुर के कारोबारी बबलू जायसवाल और बेटे राज गिरफ्तार

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

जमशेदपुर: 734 करोड़ रुपये के कथित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। गुरुवार देर रात दोनों को मेडिकल जांच के लिए एमजीएम अस्पताल लाया गया। इसके बाद ईडी की टीम उन्हें लेकर रांची रवाना हो गई।

बिष्टुपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी

ईडी की कार्रवाई का मुख्य केंद्र जमशेदपुर का बिष्टुपुर इलाका रहा। गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे जांच एजेंसी की टीम ने होटल सोननेट के सामने स्थित ज्योति अपार्टमेंट में कारोबारी के आवास और कार्यालय की तलाशी शुरू की। इसके अलावा एन रोड स्थित बीएस टावर में उनके फ्लैट और अकाउंटेंट संजय पारेख के ठिकाने पर भी छापेमारी की गई।

कार्रवाई के दौरान 50 से अधिक ईडी अधिकारियों और कर्मचारियों के शामिल होने की जानकारी है। सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न ठिकानों पर सीआरपीएफ के जवान भी तैनात रहे।

कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने दस्तावेजों के साथ कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की। संबंधित लोगों से पूछताछ भी की गई। हालांकि, ईडी की ओर से बरामद सामग्री का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

देवघर और कोलकाता में भी कार्रवाई

ईडी की छापेमारी जमशेदपुर तक सीमित नहीं रही। देवघर में विकास चटर्जी के नंदन पहाड़ स्थित आवास और बीएन झा पथ स्थित कार्यालय में भी तलाशी ली गई। वहीं, कोलकाता के दो ठिकानों पर भी जांच एजेंसी ने कार्रवाई की।

अस्पताल में कारोबारी ने लगाया फंसाने का आरोप

मेडिकल जांच के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचे बबलू जायसवाल और उनके बेटे ने ईडी की कार्रवाई का विरोध किया। बबलू जायसवाल ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और उन्हें दवा नहीं दी गई। ये आरोप कारोबारी की ओर से लगाए गए हैं।

समन के बाद छापेमारी, पहले भी जब्ती की कार्रवाई

रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने ज्ञानचंद जायसवाल और अन्य संबंधित कारोबारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किया था। एजेंसी की कार्रवाई समन के बावजूद पूछताछ में उपस्थित नहीं होने के बाद शुरू हुई।

इस मामले में इससे पहले भी ईडी कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान करीब 29 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने और फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में जमा लगभग 63 लाख रुपये जब्त करने की जानकारी सामने आई थी। इसके अलावा करोड़ों रुपये की राशि फ्रीज किए जाने की बात भी कही गई है।

135 शेल कंपनियों के नेटवर्क से जुड़ा है मामला

जांच के अनुसार, कथित घोटाले का संबंध 135 शेल कंपनियों के नेटवर्क से बताया जा रहा है। आरोप है कि इन कंपनियों के माध्यम से करीब 500 करोड़ रुपये के फर्जी चालान जारी किए गए और उनके आधार पर 734 करोड़ रुपये का अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया।

मामले का खुलासा सबसे पहले जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI), जमशेदपुर की जांच में हुआ था। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच ईडी ने शुरू की।

फिलहाल, मामले में जांच जारी है। आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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