संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
रांची: झारखंड के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में हॉस्पिटल मैनेजर पद पर नियुक्ति को लेकर हुई विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय जांच समिति के अनुसार, 201 पदों पर नियुक्ति के लिए चयनित 156 अभ्यर्थियों में से 150 को अयोग्य पाया गया, जबकि केवल 6 अभ्यर्थी ही जांच में पात्र मिले।
जांच में विज्ञापन की शर्तों के उल्लंघन, अनुभव और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में विसंगतियों तथा दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में खामियों समेत कई बिंदु सामने आए हैं।
नियुक्ति पत्र बांटने से पहले शुरू हुई जांच
हॉस्पिटल मैनेजर पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों की सूची 20 अगस्त को जारी की गई थी। चयनित अभ्यर्थियों को 3 सितंबर को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी थी। इसी बीच नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायतें सामने आईं।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों और पूरी चयन प्रक्रिया की जांच का निर्देश दिया। विभागीय उपसचिव संदीप कुमार दाराईबुरू की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई। समिति में उपसचिव ध्रुव प्रसाद और प्रशाखा पदाधिकारी श्रीहरि माधव भी शामिल थे।
जांच शुरू होने के बाद नियुक्ति पत्र वितरण की प्रक्रिया रोक दी गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को सौंप दी है।
156 में 150 अभ्यर्थी अयोग्य
जांच समिति के मुताबिक, चयनित 156 अभ्यर्थियों में से 150 की पात्रता मानकों पर खरी नहीं उतरी। इस तरह चयनित अभ्यर्थियों के बड़े हिस्से को जांच में अयोग्य पाया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में गड़बड़ियां सामने आई हैं और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अनुभव और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच में विसंगतियां
जांच के दौरान अभ्यर्थियों के अनुभव और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की भी पड़ताल की गई। समिति के सामने ऐसे मामले आए, जिनमें दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गईं।
कुछ अनुभव प्रमाणपत्रों में बदलाव किए जाने की आशंका भी जांच में सामने आई है। वहीं, कुछ मामलों में अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अनुभव और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों के बीच भी विरोधाभास पाया गया।
नौकरी का अनुभव और उसी अवधि में पढ़ाई का दावा
जांच में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अभ्यर्थियों ने जिस अवधि में नौकरी करने का अनुभव प्रमाणपत्र दिया, उसी अवधि के लिए शैक्षणिक योग्यता से संबंधित प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया।
समिति ने ऐसे मामलों में दस्तावेजों की वास्तविकता और संबंधित अभ्यर्थियों के अनुभव की वैधता की जांच की।
बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप से अनुभव सत्यापन पर सवाल
जांच समिति के सामने यह भी आया कि कई अभ्यर्थियों के अनुभव की पुष्टि के लिए बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप या अन्य जरूरी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई थी। इससे अनुभव सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
नियमों के विपरीत एक से अधिक आवेदन
जांच में तीन चयनित अभ्यर्थियों के ऐसे मामले भी सामने आए, जिन्होंने विज्ञापन में निर्धारित प्रावधानों के विपरीत एक से अधिक आवेदन किए थे। समिति ने इसे भी चयन प्रक्रिया में अनियमितता के तौर पर दर्ज किया है।
इसके अलावा कुछ अभ्यर्थियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों में आपसी संगति को लेकर भी सवाल उठे हैं।
ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड नहीं करने के बावजूद चयन का आरोप
जांच में एक अहम बिंदु यह भी सामने आया कि विज्ञापन में जरूरी प्रमाणपत्र ऑनलाइन अपलोड करने का प्रावधान था। इसके बावजूद कुछ चयनित अभ्यर्थियों द्वारा आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड नहीं किए गए थे।
इसके बाद कथित तौर पर ऑफलाइन दस्तावेज लेकर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। समिति ने इस प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा।
अब विभागीय रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद NHM की हॉस्पिटल मैनेजर नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अब विभाग रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। किन अभ्यर्थियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है, यह विभागीय कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगा।









