संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली और फर्जीवाड़े के मामले में सीआईडी ने तीन अभ्यर्थियों के खिलाफ अदालत में कई अहम साक्ष्य पेश किए हैं। आरोपियों की पहचान मनोज कुमार, उमाकांत उरांव और रोशन केरकेट्टा के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों अभ्यर्थी कथित तौर पर परीक्षा में अनुचित लाभ लेने वाले एक सेटिंग सिंडिकेट के संपर्क में थे।
10-10 लाख रुपये देने का आरोप
सीआईडी की जांच के मुताबिक, तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर बिचौलिये रमेश कुमार को करीब 10-10 लाख रुपये दिए थे। जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि आरोपियों ने अपने मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और OMR शीट की कार्बन कॉपियां रमेश कुमार और उसके नेटवर्क को सौंपी थीं।
जांच एजेंसी के अनुसार, अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान केवल उन्हीं सवालों के जवाब भरने को कहा गया था, जिनके उत्तर उन्हें निश्चित रूप से पता थे। बाकी प्रश्नों के गोले खाली छोड़ने का कथित निर्देश दिया गया था।
खाली छोड़ी गई OMR में बाद में जवाब भरने का आरोप
सीआईडी का आरोप है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद खाली छोड़ी गई OMR शीट में परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL के कुछ कर्मियों और प्रोग्रामरों की मदद से कथित तौर पर जवाब भरे जाते थे। जांच के अनुसार, परीक्षा केंद्र से निकलने के बाद OMR शीट की कार्बन कॉपियां रमेश कुमार के जरिए कथित सिंडिकेट तक पहुंचाई जाती थीं।
एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए अभ्यर्थियों की OMR शीट में बाद में बदलाव किया जाता था।
OMR की कॉपी नहीं कर सके पेश
पूछताछ के दौरान जब आरोपियों से उनकी OMR शीट की प्रतियां मांगी गईं, तो वे कथित तौर पर उन्हें पेश नहीं कर सके। वहीं, आरोपियों की ओर से खुद को निर्दोष बताते हुए यह दलील दी गई कि उन्होंने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर परीक्षा पास की थी।
अदालत में सुनवाई जारी
सीआईडी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले की अदालत में सुनवाई जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।









