नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती का प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह भारत के लोगों की सामूहिक शक्ति और प्रतिकूल परिस्थितियों से उभरने की क्षमता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन की समस्याओं का सामना करते हुए यह आर्थिक वृद्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि देश की विकास यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।
विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की अहम भूमिका
मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती बनी हुई है। वर्ष 2024-25 के अंतिम हिस्से में आई सुस्ती के बाद तिमाही वृद्धि में अच्छी गति देखने को मिली है। पहली तिमाही में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि कृषि क्षेत्र का योगदान भी सकारात्मक रहा।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बावजूद सरकार ने आवश्यक इनपुट और आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रयास किए, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर सकारात्मक असर पड़ा।
नाममात्र जीडीपी 10.3% बढ़ी
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय लेखा प्रभाग के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू ने बताया कि पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 प्रतिशत, जबकि नाममात्र जीडीपी वृद्धि 10.3 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि दोनों दरों के बीच अंतर मुख्य रूप से कीमतों और मुद्रास्फीति से जुड़े प्रभावों के कारण है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण बताया।









