छात्रों पर कार्रवाई को लेकर आदित्य साहू का सरकार पर हमला, बोले- लाठी से आंदोलन दबाया जा सकता है, आक्रोश नहीं

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रांची। झारखंड के विभिन्न जिलों में छात्र आंदोलन के दौरान कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज और मारपीट की घटना को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।

आदित्य साहू ने कहा कि शुक्रवार को रांची, हजारीबाग, गिरिडीह समेत झारखंड के विभिन्न जिलों में छात्र अपने हक और अधिकार की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कथित तौर पर झामुमो से जुड़े लोगों और पुलिस-प्रशासन द्वारा मारपीट की गई।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन करना अपराध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार छात्रों की आवाज को सुनने के बजाय उसे दबाने के लिए लाठी और दमन का सहारा ले रही है। उन्होंने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।

आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने युवाओं से कई वादे किए थे। उन वादों को पूरा करने के बजाय यदि युवाओं पर लाठियां बरसाई जाती हैं तो यह सरकार की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा डरने वाले नहीं हैं तथा वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को बल प्रयोग के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता। सरकार को युवाओं की समस्याओं और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद स्थापित करना लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी है।

आदित्य साहू ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि लाठी के बल पर आंदोलन को कुछ समय के लिए नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन युवाओं के भीतर पैदा हुए आक्रोश को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों और युवाओं की आवाज आने वाले दिनों में और मजबूती से उठेगी।

छात्र आंदोलन को लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं की ओर से लगातार सरकार पर निशाना साधे जाने से राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। भाजपा ने जहां छात्रों के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है, वहीं पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से घटना और आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

इस बीच, छात्र आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ छात्र संगठनों की भी नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यदि छात्रों की मांगों और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर आंदोलन आगे बढ़ता है तो यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक टकराव बन सकता है।

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