लिट्टीपाड़ा (पाकुड़):
प्रखंड क्षेत्र के तालपहाड़ी (तेलीटोला) गांव में चार समुदायों के पारंपरिक श्मशान घाट की जमीन पर कब्जे का मामला सामने आया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) पाकुड़ को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव के तेली, सुड़ी, नाई एवं भुईया समुदाय के एक सौ से अधिक परिवार कई पीढ़ियों से प्लॉट संख्या-1258 की लगभग चार बीघा सरकारी अनाबाद भूमि का उपयोग श्मशान घाट के रूप में करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसी भूमि पर वर्षों से दाह-संस्कार एवं दफन क्रिया की जाती रही है और यह जमीन चारों समुदायों की आस्था एवं परंपरा से जुड़ी हुई है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि गांव निवासी तरुण कुमार साह उर्फ ठाकुर डॉक्टर द्वारा बिना ग्रामीणों को सूचना दिए जेसीबी मशीन लगाकर श्मशान घाट की जमीन को खेत में बदला जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अप्रैल 2026 में उक्त जमीन पर धान की खेती के उद्देश्य से खेत तैयार कराया गया, जिससे गांव में आक्रोश का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब इस संबंध में तरुण कुमार साह से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई छविलाल साहा के नाम पर सरकार द्वारा लगभग 15 बीघा जमीन हस्तांतरित की गई है। हालांकि ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि सरकारी अनाबाद भूमि का हस्तांतरण कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इसकी जानकारी गांववासियों को नहीं दी गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, भूमि का सीमांकन कराया जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के कब्जे को रोका जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन की प्रतिलिपि अंचलाधिकारी एवं थाना प्रभारी लिट्टीपाड़ा को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है ताकि वर्षों पुरानी सामुदायिक भूमि सुरक्षित रह सके।





