संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor इन दिनों अपने पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनकी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कई जगहों पर उनकी तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व का उपयोग कर ऐसे वीडियो और सामग्री तैयार की गई, जिनका उनसे कोई संबंध नहीं है। खासकर AI और डीपफेक तकनीक के जरिए बनाए गए वीडियो को लेकर उन्होंने चिंता जताई है।
इसी मामले को लेकर शशि थरूर ने Delhi High Court में याचिका दायर की है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि उनके नाम, आवाज, तस्वीर और पर्सनैलिटी के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और ऐसी सामग्री हटाने के निर्देश दिए जाएं।
याचिका में कहा गया है कि AI तकनीक से तैयार फर्जी वीडियो और पोस्ट किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
सरल भाषा में समझें तो पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े अधिकार होते हैं। इसमें उसका नाम, चेहरा, आवाज, हस्ताक्षर, फोटो, बोलने का अंदाज, शैली और सार्वजनिक छवि शामिल होती है।
इन अधिकारों का मतलब यह है कि किसी भी व्यक्ति, खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की पहचान का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। यदि कोई संस्था, व्यक्ति या डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना अनुमति किसी की पहचान का व्यावसायिक या भ्रामक इस्तेमाल करता है, तो संबंधित व्यक्ति कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI और डीपफेक तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा अब और महत्वपूर्ण हो गया है। इससे फर्जी वीडियो, नकली आवाज और भ्रम फैलाने वाली सामग्री का खतरा बढ़ता जा रहा है।
डिजिटल युग में यह मामला सिर्फ बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों की पहचान और निजता की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।








