
तीनपहाड़। क्षेत्र के बभनगामा गांव के लोगों का हालात ऐसे हैं कि “दीये तले अंधेरा” वाली कहावत यहां साक्षात नजर आ रही है। बभनगामा बिजली उपकेंद्र से महज 500 मीटर के दायरे में फॉल्ट ढूंढने में बिजली विभाग के मिस्त्री गुरुवार सुबह से लगे हैं, लेकिन शुक्रवार अहले 3:00 बजे तक भी “सुई ढूंढने निकले थे, ऊंट खो बैठे” जैसी स्थिति बनी हुई है।
मिस्त्रियों की टीम पोलखुटा खंभों पर चढ़-उतरकर, तारों को अंदर-बाहर खंगालते हुए ऐसे तलाश में जुटी रही मानो “खोदा पहाड़, निकली चुहिया” का नया संस्करण लिखना हो। केबल को जगह-जगह काटकर जांचा गया, फिर भी फॉल्ट है कि “हाथ कंगन को आरसी क्या” की तरह सामने आने को तैयार ही नहीं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उपकेंद्र के बिल्कुल नजदीक यह समस्या “नाक के नीचे से” विभाग को चकमा दे रही है। हालत देख लोग तंज कस रहे हैं-घर का भेदी लंका ढाए”, लेकिन यहां तो भेदी भी नहीं मिल रहा! इधर शॉर्ट सर्किट की आंख-मिचौली जारी है और बिजली कभी आती है, कभी जाती है—जैसे “बिन बुलाए मेहमान” का आना-जाना लगा हो। ऊपर से गर्मी ने लोगों का हाल “तवे पर रखी रोटी” जैसा कर दिया है। स्थानीय लोगों का गुस्सा अब साफ झलकने लगा है। लोगों का कहना है कि जब उपकेंद्र के पास ही फॉल्ट नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो दूर-दराज इलाकों का भगवान ही मालिक है। बिजली विभाग की इस सुस्ती पर लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं—“नाच न जाने आंगन टेढ़ा”, और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।








