नई दिल्ली। भारत और विश्व बैंक ने पारंपरिक ऋण देने से आगे बढ़कर आपसी साझेदारी का दायरा बढ़ाने पर चर्चा की है। इसमें अवसंरचना वित्तपोषण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, पर्यटन और निजी पूंजी जुटाने जैसे क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के ऐशविले में आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक के दौरान विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की। बैठक में भारत में विश्व बैंक समूह की बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) की भूमिका को और मजबूत करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
प्रस्तावित साझेदारी का उद्देश्य गारंटी तंत्र के व्यवस्थित इस्तेमाल के जरिए अधिक निजी पूंजी जुटाना और भारत के कॉर्पोरेट, बुनियादी ढांचा तथा नगरपालिका बॉन्ड बाजारों को मजबूत करना है। इससे विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान भारत और विश्व बैंक के बीच साझेदारी को और मजबूत करने तथा विश्व बैंक के विभिन्न वित्तपोषण साधनों के व्यापक उपयोग के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भारत का जोर अब विकास परियोजनाओं के लिए केवल पारंपरिक ऋण पर निर्भर रहने के बजाय गारंटी, निजी निवेश और वैकल्पिक वित्तीय साधनों के माध्यम से बड़े स्तर पर पूंजी जुटाने पर है। प्रस्तावित सहयोग इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।









