JPSC-JSSC छात्रों के धरनास्थल पर देर रात प्रशासनिक हलचल, भाजपा ने लगाया दबाव बनाने का आरोप; अधिकारियों ने बताया- सत्यापन और संवाद के लिए पहुंचे

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रांची। JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया की जांच की मांग को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन जारी है। विधानसभा मार्च के बाद देर रात धरनास्थल पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने से राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई। अधिकारियों ने छात्र नेताओं से बातचीत की, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की और आंदोलन की कोर कमेटी के सदस्यों की जानकारी लेने की बात सामने आई। इसके बाद भाजपा के कई नेता भी देर रात धरनास्थल पर पहुंच गए।

छात्र नेता बोले- प्रशासन ने मांगे कोर कमेटी के सदस्यों के नाम-पते

छात्र नेता पीयूष कुमार ने बताया कि SDO और ADM धरनास्थल पर अनौपचारिक बातचीत करने और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से छात्रों को फिलहाल कोई आधिकारिक संदेश नहीं दिया गया है।



पीयूष कुमार के अनुसार प्रशासन कोर कमेटी के सदस्यों के नाम और पते मांग रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र इसमें सहयोग कर रहे हैं, क्योंकि वे अपराधी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन को लेकर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

छात्र नेता राजेश प्रसाद ने कहा कि देर रात SSP, SP और DC समेत वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने पहले भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत की और उनके नाम व घर की जानकारी लेने का प्रयास किया। इसके बाद DC ने JSSC CGL अभ्यर्थियों से भी बातचीत की।

प्रशासन बोला- असामाजिक तत्वों और बाहरी लोगों के सत्यापन के लिए पहुंचे

रांची के CO शिव शंकर पांडेय ने कहा कि प्रशासनिक टीम धरनास्थल पर सत्यापन के लिए पहुंची थी। उनका कहना था कि यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि भीड़ में कोई असामाजिक तत्व या ऐसे बाहरी लोग शामिल न हों, जिनकी पहचान सत्यापित नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के नाम और पते की जानकारी लेने का उद्देश्य प्रशासन को स्थिति पर नजर रखने में मदद करना और किसी अवांछित गतिविधि की स्थिति में छात्रों के सहयोग से निगरानी सुनिश्चित करना है।



सिटी SP पारस राणा ने भी कहा कि प्रशासन को कुछ असामाजिक तत्वों और ऐसे बाहरी लोगों की मौजूदगी की सूचना मिली थी, जिनकी पहचान सत्यापित नहीं थी। इसी कारण पुलिस टीम सत्यापन और छात्रों से बातचीत के लिए पहुंची। उन्होंने कहा कि वह पिछले चार दिनों से प्रतिदिन आंदोलन स्थल पर आ रहे हैं।



DC ने कहा- भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के स्वास्थ्य की चिंता

रांची के DC मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशासन यह देखने के लिए पहुंचा था कि आंदोलनकारी छात्रों को किसी तरह की कमी या परेशानी तो नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि दो छात्र भूख हड़ताल पर हैं और प्रशासन ने उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भोजन करने का आग्रह किया है।

DC ने कहा कि जिला प्रशासन बातचीत और परामर्श के लिए हमेशा तैयार है तथा छात्रों को 24 घंटे सहयोग देने की बात कही गई है। उन्होंने आंदोलनकारियों से व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले अगले कदम की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

हालांकि, DC ने आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी जिक्र किया। उनके अनुसार 14 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि एक पुलिसकर्मी को बचाने और दूसरे पुलिसकर्मी के पत्थर लगने के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप जरूरी हुआ और हल्का बल प्रयोग किया गया।

भाजपा नेताओं ने रात में प्रशासन के पहुंचने पर उठाए सवाल

देर रात प्रशासनिक अधिकारियों के धरनास्थल पहुंचने की सूचना के बाद भाजपा के कई नेता भी वहां पहुंचे। पूर्व भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने आरोप लगाया कि रात के समय छात्रों के बीच पहुंचकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अकेला समझना प्रशासन की बड़ी भूल होगी।

भाजपा नेता अमर कुमार बाउरी ने कहा कि रात में इस तरह छात्रों को डराने या दबाव में लेने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन छात्रों को जबरन हटाने की कोशिश कर रहा है।

भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि प्रशासन रात में धरना स्थल खाली कराने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन को कोई कार्रवाई करनी है तो दिन के उजाले में करनी चाहिए, रात के अंधेरे में छात्रों को हटाने का प्रयास नहीं होना चाहिए।

प्रतुल शाहदेव का आरोप- रात में कार्रवाई की तैयारी की सूचना मिली थी

भाजपा नेता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि छात्रों को रात में हटाने के लिए पुलिस की कार्रवाई की तैयारी की सूचना मिलने के बाद भाजपा नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि रात करीब 12:30 बजे DC और SSP का धरनास्थल पर पहुंचना सामान्य प्रक्रिया नहीं है।

शाहदेव ने दावा किया कि करीब आधा किलोमीटर के दायरे में 500 से 600 पुलिसकर्मी लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और प्रशासन दिन में विधानसभा के सामने लाठीचार्ज करता है तथा रात में उन्हें हटाने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, शाहदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा आंदोलन में शामिल नहीं हो रही है, बल्कि छात्रों को नैतिक समर्थन दे रही है।

बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर लगाया लोकतांत्रिक अधिकार दबाने का आरोप

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी देर रात की कार्रवाई को लेकर हेमंत सरकार और रांची जिला प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें सुबह सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जानकारी मिली कि देर रात DC और सिटी SP जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पहुंचे थे।

मरांडी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिजली बंद कराकर छात्रों को जबरन वहां से हटाने का प्रयास किया और अधिकारियों की ओर से यह कहा गया कि सरकार ने JPSC परीक्षा रद्द कर दी है, इसलिए धरना समाप्त कर दिया जाए। हालांकि, प्रशासन की ओर से छात्रों को जबरन हटाने या बिजली बंद कराने के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने अपनी मौजूदगी को सत्यापन, सुरक्षा और छात्रों से संवाद से जुड़ा बताया है।

मरांडी ने कहा कि केवल JPSC परीक्षा रद्द करने से पूरे मामले का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार छात्रों की मांग JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा नौकरी बेचने के आरोपों की निष्पक्ष CBI जांच की है। उन्होंने सरकार से तत्काल CBI जांच का आदेश देने और छात्रों की अन्य मांगों पर भी कार्रवाई करने की मांग की।

उन्होंने प्रशासन से धरनास्थल पर बिजली, पानी, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की।

अब बातचीत और आंदोलन के अगले कदम पर नजर

देर रात की गतिविधियों के बीच प्रशासन ने छात्रों के साथ संवाद जारी रखने और उनकी सुरक्षा व स्वास्थ्य का ध्यान रखने की बात कही है। वहीं छात्र नेता मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आगे ठोस कदम उठाने की बात कह रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन आंदोलनकारी छात्रों के साथ आगे किस स्तर पर बातचीत करते हैं और JPSC-JSSC से जुड़ी छात्रों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाया जाता है।

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