संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) की कथित लापरवाही के कारण लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद शुरू हुई सिकनी कोलियरी का उत्पादन महज 18 दिनों में फिर बंद हो गया। 13 फरवरी 2026 को कोयला उत्पादन शुरू होने से मजदूरों और कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी, लेकिन 2 मार्च को अचानक उत्पादन रोक दिया गया।
जानकारी के अनुसार बिना स्वीकृत माइन प्लान के ही कोलियरी का संचालन शुरू कर दिया गया था। विधि विशेषज्ञों ने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई की आशंका जताई, जिसके बाद प्रबंधन को उत्पादन बंद करना पड़ा।
कोलियरी बंद होने से स्थायी और संविदा मिलाकर 1200 से अधिक मजदूरों के सामने फिर रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें अक्टूबर 2024 से नियमित वेतन भी नहीं मिला है।
सिर्फ मजदूर ही नहीं, बल्कि ट्रक चालक, दुकानदार, वेंडर और छोटे कारोबारियों समेत करीब 5000 से अधिक लोग भी इस परियोजना पर अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। उत्पादन शुरू होने के बाद इलाके में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई थीं, लेकिन अचानक बंदी से एक बार फिर हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो गई है।
झारखंड कोलियरी मजदूर संघ के नेता रवि डे ने JSMDC अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी सिकनी कोलियरी को चालू रखने के प्रति गंभीर नहीं हैं और बार-बार नई अड़चनें पैदा की जा रही हैं।
रवि डे ने कहा कि 6000 से अधिक परिवार इस परियोजना पर निर्भर हैं, लेकिन अधिकारियों को मजदूरों की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारियों का वेतन रोका जाए, तभी उन्हें मजदूरों के दर्द का एहसास होगा।
कोलियरी बंद होने के बाद क्षेत्र में मजदूरों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और निगम प्रबंधन उत्पादन दोबारा शुरू कराने के लिए क्या कदम उठाते हैं।







