वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने पर ओवैसी का विरोध

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संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क

Asaduddin Owaisi ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार का विरोध किया है। AIMIM प्रमुख ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह एक देवी को समर्पित रचना है।

हैदराबाद सांसद ओवैसी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि देश किसी देवी-देवता के नाम पर नहीं चलता और न ही किसी विशेष धर्म का होता है। उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ भारत और उसके नागरिकों का गुणगान करता है, जबकि धर्म और राष्ट्र को एक नहीं माना जा सकता।

ओवैसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के लेखक Bankim Chandra Chattopadhyay की ब्रिटिश शासन के प्रति सहानुभूति थी और वे मुसलमानों के प्रति नकारात्मक सोच रखते थे। उन्होंने दावा किया कि Subhas Chandra Bose, Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru और Rabindranath Tagore जैसे नेताओं ने भी इसे लेकर आपत्तियां जताई थीं।

ओवैसी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे संवैधानिक और धार्मिक दृष्टिकोण से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष ‘वंदे मातरम्’ को स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणादायक धरोहर मान रहा है।

फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।

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