संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
Amba Prasad बड़कागांव रोहाने कोल ब्लॉक क्षेत्र के प्रभावित रैयतों को लेकर हजारीबाग डीसी ऑफिस पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने उपायुक्त हेमंत सती और सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय से मुलाकात कर मुआवजा, पुनर्स्थापन और पुनर्वासन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में दर्जनों प्रभावित रैयत भी मौजूद रहे।
अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि वर्षों से जंगल क्षेत्र में रह रहे आदिवासी परिवारों को रोहाने कोल ब्लॉक प्रबंधन द्वारा जबरन हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि विवाद का मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में लंबित है। यह भूमि वर्ष 2011-12 में अधिग्रहित की गई थी। बाद में रोहाने कोल ब्लॉक निरस्त होने के पश्चात क्षेत्र को NMDCL को आवंटित कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि भूमि संबंधित रैयतों को वापस तो कर दी गई, लेकिन मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण नामांतरण नहीं हो सका। उच्च न्यायालय ने अंतिम निर्णय आने तक भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
अंबा प्रसाद ने मांग की कि विस्थापित परिवारों का पुनर्स्थापन एवं पुनर्वासन NMDCL द्वारा किया जाए और जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक भूमि कंपनी को हस्तांतरित न की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 70 एकड़ भूमि सीएनटी एक्ट का पालन किए बिना खरीदी गई है, इसलिए प्रभावितों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत सभी लाभ दिए जाने चाहिए।
इसके अलावा गैर मजरूआ भूमि पर बसे प्रभावित परिवारों को संरचना मुआवजा, पुनर्वासन और पुनर्स्थापन राशि उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।
उपायुक्त और सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी पक्षों की बात ध्यानपूर्वक सुनने के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
इस मौके पर जिला परिषद सदस्य गीता देवी, समाजसेवी दीपक करमाली, महेंद्र मांझी, गंगाराम मांझी, जोपाल मांझी, तालो बेसरा, सुरेश हांसदा, जीवन हांसदा, लक्ष्मण मांझी, राजेंद्र मरांडी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रभावित परिवार उपस्थित रहे।








