ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश ने गंगा नदी (पद्मा) पर 2.1 किलोमीटर लंबे पद्मा बैराज के निर्माण की घोषणा की है। यह प्रस्तावित बैराज भारत के पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बैराज से लगभग 180 किलोमीटर दूर बनाया जाएगा। इस परियोजना को बांग्लादेश की जल प्रबंधन रणनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बांग्लादेश का लंबे समय से आरोप रहा है कि फरक्का बैराज के कारण उसके कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है। इसी पृष्ठभूमि में पद्मा बैराज परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह परियोजना दक्षिण-पश्चिमी और उत्तरी बांग्लादेश के लगभग 6.5 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाएगी।
प्रस्तावित पद्मा बैराज में करीब 2,900 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता होगी। इसके माध्यम से सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, कृषि उत्पादन और जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि भारत का फरक्का बैराज गंगा नदी पर बना एक महत्वपूर्ण जल ढांचा है। इसका निर्माण भागीरथी-हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने और कोलकाता बंदरगाह को सुचारु रूप से संचालित करने के उद्देश्य से किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि पद्मा बैराज परियोजना आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे तथा नदी प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को नई दिशा दे सकती है। हालांकि इस परियोजना के पर्यावरणीय और क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन अभी किया जाना बाकी है।
जल संसाधनों को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि गंगा-पद्मा जैसी साझा नदियां करोड़ों लोगों की आजीविका और जीवन से जुड़ी हुई हैं।
