📍 नई दिल्ली | संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
केंद्र सरकार ने “वंदे मातरम” के सम्मान को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत “वंदे मातरम” के अपमान को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इस फैसले के बाद अब “वंदे मातरम” के अपमान को राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के दायरे में लाया जाएगा।
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति “वंदे मातरम” का अपमान करता है या उसे जानबूझकर अपमानित करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का मानना है कि “वंदे मातरम” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इसलिए इसके सम्मान की रक्षा के लिए सख्त कानून जरूरी है।
गौरतलब है कि “वंदे मातरम” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का प्रमुख नारा रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज भी करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई नेताओं और संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं कुछ विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने कानून के दुरुपयोग और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस फैसले को लागू करने के लिए संबंधित अधिसूचना और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद “वंदे मातरम” के अपमान से जुड़े मामलों में सीधे कार्रवाई संभव होगी।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में लोग इसे राष्ट्रभक्ति से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय बता रहे हैं।









