संथाल हूल एक्सप्रेस डेस्क
रांची। झारखंड में OBC आरक्षण और आबादी के अनुपात में अधिकार व प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर मंगलवार, 6 अक्टूबर को पांच जिलों में बंद का आह्वान किया गया। केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति के आह्वान पर रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में बंद और चक्का जाम किया गया। कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं और सड़क यातायात प्रभावित हुआ।
गुमला में सबसे ज्यादा असर, NH-43 और NH-143 पर यातायात प्रभावित
गुमला में सुबह से ही बड़ी संख्या में बंद समर्थक सड़कों पर उतरे। टावर चौक, पटेल चौक और डुमरडीह चौक समेत कई स्थानों पर सड़क जाम किए जाने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। शहर की अधिकांश दुकानें भी बंद रहीं।
राष्ट्रीय राजमार्ग-43 और NH-143 पर भी बंद का असर देखने को मिला। सड़क जाम के कारण कई जगह वाहनों की कतार लग गई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को कई स्थानों पर जाने दिया गया।
टावर चौक पर जाम से स्कूली बच्चों और यात्रियों को परेशानी
गुमला के टावर चौक के पास बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर आवागमन बाधित किया। इसका असर स्कूली बच्चों और यात्रियों पर भी पड़ा। कई लोगों को वैकल्पिक रास्तों और साधनों का सहारा लेना पड़ा।
बंद के कारण बसों और अन्य यात्री वाहनों का परिचालन भी प्रभावित रहा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को रास्ता देने की बात कही गई।
कई जगह टायर जलाकर प्रदर्शन
गुमला शहर के अलावा जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी बंद समर्थक प्रदर्शन करते नजर आए। कुछ स्थानों पर टायर जलाकर सड़क जाम किया गया। समर्थक समूह बनाकर प्रमुख चौक-चौराहों पर पहुंचे और दुकानदारों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि OBC समाज के सामाजिक, राजनीतिक और सरकारी व्यवस्था में प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय है।
क्या हैं OBC संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें?
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति की ओर से मुख्य रूप से ये मांगें उठाई जा रही हैं—
- सरकारी नौकरियों में OBC को आरक्षण दिया जाए।
- आबादी के अनुपात में OBC को अधिकार और प्रतिनिधित्व मिले।
- राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की व्यवस्था की जाए।
- PESA कानून के तहत OBC समाज को भी अधिकार दिए जाएं।
समिति का कहना है कि OBC की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आने से योजनाओं, आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर नीतियां तय करने में मदद मिलेगी।
नेताओं ने जताई नाराजगी
गुमला में प्रदर्शन के दौरान OBC नेता शिवदयाल गोप ने कहा कि समाज के लोगों को मजबूरी में सड़कों पर उतरना पड़ा है। उन्होंने आबादी के अनुपात में अधिकार और सरकारी नौकरियों में पर्याप्त अवसर देने की मांग की।
वहीं, OBC नेता दिलीप नाथ साहू ने कहा कि संयुक्त बिहार के समय OBC को आरक्षण मिलता था, लेकिन झारखंड बनने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया। उन्होंने OBC समाज को उसके अधिकार और प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग उठाई।
OBC युवा नेता कौशल साहू ने कहा कि यह आंदोलन समाज के हक और अधिकार से जुड़ा है। बंद समर्थकों ने आम लोगों को हो रही परेशानी के लिए खेद जताते हुए आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की बात कही।
सोमवार को निकाला गया था मशाल जुलूस
बंद से एक दिन पहले सोमवार शाम रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा समेत विभिन्न स्थानों पर मशाल जुलूस निकाला गया था। इसके जरिए लोगों से मंगलवार के बंद में सहयोग करने की अपील की गई थी।
खूंटी, सिमडेगा और लोहरदगा में भी असर
खूंटी के तोरपा समेत कई इलाकों में बंद का असर देखने को मिला। अधिकांश दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे तथा सामान्य दिनों की तुलना में सड़कों पर आवाजाही कम रही। बसों का परिचालन प्रभावित होने से यात्रियों को परेशानी हुई।
सिमडेगा और लोहरदगा में भी बंद समर्थकों के सक्रिय रहने की जानकारी सामने आई है। बंद को देखते हुए प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस बल को सतर्क रखा गया।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
केंद्रीय पिछड़ी जाति संघर्ष समिति ने कहा है कि OBC समाज लंबे समय से आरक्षण, अधिकार और प्रतिनिधित्व की मांग उठा रहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को आगे और तेज किया जाएगा।
समिति ने बंद के दौरान लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने तथा आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने की अपील की है।









