तीनपहाड़ और बरहरवा स्टेशन से पांच नाबालिग बच्चे रेस्क्यू, आरपीएफ ने सुरक्षित संरक्षण में सौंपा

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संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता जितेन्द्र सेन

बरहरवा/तीनपहाड़। आरपीएफ पोस्ट बरहरवा की टीम ने रविवार रात से सोमवार तड़के तक तीनपहाड़ और बरहरवा रेलवे स्टेशन परिसर में गश्त एवं चेकिंग के दौरान अलग-अलग परिस्थितियों में पांच नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित संरक्षण में सौंपा। आरपीएफ पोस्ट बरहरवा के प्रभारी संजीव कुमार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
आरपीएफ के अनुसार, 04 अक्टूबर की रात करीब 10:35 बजे तीनपहाड़ रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में गश्त के दौरान एक नाबालिग बालिका अपने करीब दो वर्षीय छोटे भाई को गोद में लेकर अकेले घूमती मिली। पूछताछ में बालिका ने बताया कि पारिवारिक कारणों से वह अपने छोटे भाई को लेकर घर से निकल गई थी और भटकते हुए तीनपहाड़ रेलवे स्टेशन पहुंच गई। दोनों बच्चों को आरपीएफ ने सुरक्षित अभिरक्षा में ले लिया।



इसके बाद 05 अक्टूबर की रात करीब 12:20 बजे बरहरवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 और वेटिंग रूम में चेकिंग के दौरान अलग-अलग स्थानों से तीन अन्य नाबालिग बच्चे मिले। पूछताछ में सभी के बिना माता-पिता को बताए घर से निकलने की बात सामने आई। इनमें तीनपहाड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले 17 वर्षीय नाबालिग बालक और 16 वर्षीय नाबालिग बालिका ने बताया कि दोनों करीब दो वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे और परिवार की सहमति नहीं होने के कारण 04 अक्टूबर को घर से निकलकर बरहरवा स्टेशन पहुंचे थे। दोनों पश्चिम बंगाल की ओर जाने का प्रयास कर रहे थे।



वहीं, बरहेट थाना क्षेत्र की 16 वर्षीय नाबालिग बालिका ने बताया कि फेसबुक के माध्यम से करीब एक वर्ष से पटना निवासी एक व्यक्ति से उसकी बातचीत थी। परिवार के विरोध और डांट-फटकार के बाद वह 04 अक्टूबर की रात करीब आठ बजे घर से निकलकर सड़क मार्ग से बरहरवा स्टेशन पहुंची थी। वह उक्त व्यक्ति से मिलने के लिए पटना जाने का प्रयास कर रही थी।



आरपीएफ ने सभी पांचों बच्चों को बरहरवा आरपीएफ पोस्ट लाकर आवश्यक पूछताछ और सत्यापन किया तथा उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद नियमानुसार वैधानिक प्रक्रिया पूरी करते हुए सभी बच्चों को मंथन बरहरवा की प्रतिनिधि आराधना मंडल और अंशु मालाकार को आगे की आवश्यक कार्रवाई, देखरेख एवं संरक्षण के लिए सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों से नियमित संवाद बनाए रखें, उनकी भावनात्मक एवं व्यक्तिगत समस्याओं को समझें और मोबाइल फोन के उपयोग तथा गतिविधियों पर उचित निगरानी रखें, ताकि बच्चे बिना बताए घर से निकलकर किसी जोखिमपूर्ण स्थिति में न पहुंचें।

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