संथाल हूल एक्सप्रेस संवाददाता
साहिबगंज। झारखंड में मयरा-मैरा मोदक जाति के अभ्यर्थियों को जाति प्रमाणपत्र बनवाने और दस्तावेज सत्यापन के दौरान कथित तकनीकी विसंगतियों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान और समाज की विभिन्न मांगों को लेकर आगामी 22 अक्टूबर, गुरुवार को बोरियो में महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसकी जानकारी समाज के वरिष्ठ एवं प्रबुद्ध सदस्य निर्मल कुमार दे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
निर्मल कुमार दे के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल में मयरा मोदक जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची में स्थान प्राप्त है, जबकि झारखंड में इसे पिछड़ा वर्ग अनुसूची-एक में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि झारखंड में इस जाति को सूची में क्रमांक 129 पर शामिल किए जाने का उल्लेख भारत के राजपत्र में 17 फरवरी 2014 की अधिसूचना के तहत किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि झार सेवा पोर्टल पर जाति का नाम केंद्रीय सूची के अनुरूप स्पष्ट रूप से प्रदर्शित नहीं होने तथा अलग-अलग स्थानों पर ‘मयरा-मैरा’ और ‘मोदक’ नाम प्रदर्शित होने के कारण अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समाज की ओर से दावा किया गया है कि इस कथित तकनीकी विसंगति के कारण कुछ अभ्यर्थियों के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरी से संबंधित अवसर प्रभावित हुए हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, समस्या के समाधान की मांग को लेकर 15 सितंबर को कार्मिक विभाग के सचिव को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन दिया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर मामले में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की गई है।
समाज की समस्याओं, जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी परेशानियों और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए 22 अक्टूबर को बोरियो में महासम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों से समाज के युवा, प्रतिनिधि और प्रबुद्ध सदस्य शामिल होंगे। महासम्मेलन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
समाज की मुख्य मांग है कि जाति के नाम से संबंधित पोर्टल की विसंगतियों को दूर किया जाए तथा मयरा-मैरा मोदक जाति के अभ्यर्थियों को जाति प्रमाणपत्र एवं दस्तावेज सत्यापन में होने वाली परेशानियों से राहत दिलाई जाए।









