IIM रांची में ‘आईआईएम रांची वाणी’ का विमोचन, ऋत्विक उदयन ने बताए नेतृत्व और सफलता के मंत्र

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रांची: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची में राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित हिंदी पखवाड़ा 2026 का समापन साहित्यिक प्रस्तुतियों और नेतृत्व संवाद के साथ हुआ। कार्यक्रम में डेलॉइट के कार्यकारी निदेशक ऋत्विक उदयन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वह राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के पौत्र हैं। इस अवसर पर संस्थान की पहली हिंदी गृह पत्रिका ‘आईआईएम रांची वाणी’ का विमोचन भी किया गया।

‘रश्मिरथी’ के जरिए समझाया नेतृत्व का महत्व

कार्यक्रम के दौरान ऋत्विक उदयन ने दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ का सस्वर पाठ किया और साहित्य तथा नेतृत्व के बीच संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य का संरक्षण और प्रसार आवश्यक है।

उन्होंने दिनकर की पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ और पंडित जवाहरलाल नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ का उल्लेख करते हुए इतिहास, संस्कृति और समाज के वैचारिक विकास के विभिन्न पहलुओं को समझाया।

महाभारत के प्रसंगों से बताए प्रबंधन के सूत्र

ऋत्विक उदयन ने ‘रश्मिरथी’ और महाभारत के प्रसंगों को कॉर्पोरेट जगत से जोड़ते हुए प्रतिभा की पहचान, बातचीत की कला, रणनीति और कार्यस्थल पर निर्णय लेने जैसे विषयों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि प्रतिभा और योग्यता को समय पर पहचान मिलना हमेशा आसान नहीं होता। श्रीकृष्ण के हस्तिनापुर प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बातचीत और हितधारक प्रबंधन का महत्व समझाया। वहीं, घटोत्कच के बलिदान और कर्ण की निष्ठा के प्रसंगों से रणनीतिक निर्णयों तथा कठिन परिस्थितियों में सही विकल्प चुनने से जुड़े सवालों को सामने रखा।

सफलता के तीन मूल मंत्र

अपने संबोधन में उदयन ने सफलता के तीन प्रमुख सूत्र बताए—प्रतिभा की समय पर पहचान और सराहना, अहंकार का त्याग तथा असफलताओं से सीख लेकर गलतियों को दोहराने से बचना। उन्होंने साहित्यिक उदाहरणों के माध्यम से नेतृत्व और प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया।

65 से अधिक हिंदी रचनाओं से सजी पत्रिका

समारोह में ‘आईआईएम रांची वाणी’ का विमोचन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। पत्रिका में संस्थान के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की 65 से अधिक हिंदी रचनाएं शामिल हैं। इसमें लेख, यात्रा संस्मरण, कविताएं, शायरियां और निबंध के साथ राजभाषा प्रकोष्ठ की सालभर की गतिविधियों का विवरण भी संकलित किया गया है।

नाटकों के जरिए सामाजिक और मानवीय विषयों की प्रस्तुति

साहित्यिक संध्या में विद्यार्थियों के ड्रामेबाज क्लब ने दो नाटकों का मंचन किया। पहला नाटक ‘अंतराल’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कहानी पर आधारित था, जिसमें भौतिक आकांक्षाओं और पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ती दूरी को दिखाया गया। वहीं, ‘दो तरफ़ा’ में मनुष्य के बाहरी व्यक्तित्व और आंतरिक द्वंद्व को मंच पर प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के अंत में हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों और नाट्य मंचन में शामिल विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साहित्य, रंगमंच और नेतृत्व संवाद के साथ संस्थान का हिंदी पखवाड़ा 2026 संपन्न हुआ।

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