संथाल हूल एक्सप्रेस सेंट्रल डेस्क
तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और सत्ता का रिश्ता दशकों पुराना और बेहद गहरा रहा है। यहां फिल्मी सितारे सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे जनता के बीच एक सामाजिक और राजनीतिक प्रतीक के रूप में उभरते हैं। यही वजह है कि इस राज्य में कई अभिनेता बड़े राजनीतिक नेता और मुख्यमंत्री तक बन चुके हैं।
द्रविड़ आंदोलन से निकली राजनीति ने सिनेमा को एक प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया। फिल्मों के जरिए सामाजिक न्याय, समानता और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों को जनता तक पहुंचाया गया। इस प्रक्रिया में अभिनेता सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि जननायक बन गए।
एमजी रामचंद्रन (MGR) से लेकर जयललिता और अब विजय जैसे सितारों ने फिल्मों में अपनी छवि एक ऐसे नायक के रूप में बनाई, जो गरीबों का हितैषी, महिलाओं का सम्मान करने वाला और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाला होता है। यह छवि पर्दे से निकलकर वास्तविक जीवन में भी जनता के बीच गहराई से स्थापित हो जाती है।
तमिलनाडु में फिल्मी सितारों के मजबूत फैन क्लब होते हैं, जो समय के साथ राजनीतिक कार्यकर्ताओं में बदल जाते हैं। जब ये सितारे राजनीति में कदम रखते हैं, तो यही फैन क्लब एक मजबूत कैडर के रूप में काम करते हैं और चुनावी मैदान में उनकी ताकत बनते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यहां ‘नायकवाद’ यानी हीरो वर्शिप भी एक बड़ी भूमिका निभाता है। लोग अपने पसंदीदा सितारों को केवल अभिनेता नहीं, बल्कि एक आदर्श नेता के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि उच्च साक्षरता दर के बावजूद तमिलनाडु में फिल्मी सितारों को व्यापक जनसमर्थन मिलता है।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति का यह अनोखा संगम फिल्मी सितारों को सियासी सुपरस्टार बना देता है, जो भारतीय राजनीति की एक विशिष्ट और प्रभावशाली पहचान बन चुका है।









