3 दशक तक सिफर, अब शिखर पर पहुंची बीजेपी

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सफर लंबे समय तक संघर्षपूर्ण रहा है। वर्ष 1982 में राज्य की चुनावी राजनीति में कदम रखने वाली पार्टी को शुरुआती तीन दशकों तक कोई खास सफलता नहीं मिली। 1982, 1987, 1991, 1996, 2001, 2006 और 2011 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी अपना खाता तक नहीं खोल सकी और लगातार शून्य सीटों पर सिमटी रही।

हालांकि, वर्ष 2016 का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस चुनाव में पार्टी ने पहली बार बंगाल में अपना खाता खोला और 3 सीटें जीतकर राजनीतिक जमीन तैयार करने का संकेत दिया। इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए सीधे 77 सीटों पर कब्जा जमाया और मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का यह उभार राज्य की बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन के विस्तार और आक्रामक चुनावी रणनीति का परिणाम है। पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाया।

अब, खाता खुलने के लगभग एक दशक बाद, बीजेपी बंगाल में सत्ता की ओर अग्रसर दिखाई दे रही है। हालिया चुनावी रुझानों और जनसमर्थन के आधार पर यह माना जा रहा है कि पार्टी इस बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।

कुल मिलाकर, बंगाल में बीजेपी का यह सफर शून्य से शिखर तक पहुंचने की एक बड़ी राजनीतिक कहानी बन चुका है, जिसने राज्य की पारंपरिक राजनीति को नई दिशा देने का काम किया है।

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