डेढ़ सौ साल से जल रही आस्था की ज्योति, तीन पीढ़ियों ने सहेजी बभनगामा की काली पूजा की परंपरा

चार आने और सोलह आने के चंदे से सजता था पूजा का आयोजन, बांस-तिरपाल के नीचे होती थी मां काली की आराधना जात्रा से गांव की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई, दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी नेताजी नाट्य समिति बभनगामा स्वर्गीय खुदीराम दत्ता के योगदान और गांव की सांस्कृतिक विरासत को आज भी याद कर […]